क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, वकील और पत्रकार श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि

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क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, वकील और पत्रकार श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि
क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, वकील और पत्रकार श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि

क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, वकील और पत्रकार श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि

क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, वकील और पत्रकार श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि। वह लंदन में इंडियन होम रूल सोसाइटी और इंडिया हाउस के संस्थापक थे – भारत के बाहर क्रांतिकारी भारतीय राष्ट्रवाद के प्रमुख केंद्र भी रहे .

श्यामजी कृष्ण वर्मा ने 4 अक्टूबर1857 को गुजरात प्रान्त में जन्म लिया। उनके पिता का नाम श्रीकृष्ण वर्मा था।श्यामजी कृष्ण वर्मा क्रान्तिकारी गतिविधियों के माध्यम से भारत की आजादी के संकल्प को मजबूत करने वाले दृढ़ निश्चय और कई क्रान्तिकारियों के प्रेरणास्रोत रहे थे। वे पहले भारतीय थे, जिन्हें ऑक्सफोर्ड से एम॰ए॰ और बार-ऐट-ला की उपाधियाँ पुरुस्कृत किया गया।

उन्होंने एक बार संस्कृत में भाषण दिया। जिससे प्रभावित मोनियर विलियम्स बहुत अधिक प्नेरभावित हुए। जिसके चलते मोनियर विलियम्स ने वर्माजी को ऑक्सफोर्ड में संस्कृत का सहायक प्रोफेसर बना दिया था।

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ये अपनी वकालत दौरान से ही स्वराज के लिए बढ़ चढ़ आगे आ रहे थे और मात्र 20 वर्ष की आयु में ही क्रांतिक्रारी कार्यों में भाग लेने लगे थे। वे कुछ समय के लिए मध्यप्रदेश में दीवान भी रहे और वही पर जनहीत के लिए कई कार्य किये। ये लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और स्वामी दयानंद सरस्वती को अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते थे।


ये कुछ समय के लिए इंग्लैंड भी इस दौरान भी इन्होने कई क्रन्तिकारी कार्य करें- जैसे लॉर्ड कर्जन की ज्यादतियों का कडा विरोध , मासिक समाचार-पत्र “द इण्डियन सोशियोलोजिस्ट” प्रकाशित किया , इंग्लैंड में ही इंडिया हाउस की स्थापना की।


इसके बाद वो भारत लौट आये , भारत आने के बाद भी वे इन कार्यों में आगे रहे और उन्होंने क्रान्तिकारी छात्रों को लेकर 1905 में इण्डियन होम रूल सोसायटी की स्थापना कर दी। जिसमे उनके प्रिय शिष्य क्रन्तिकारी मदन लाल ढींगरा शहीद हो गए थे। फिर जिनेवा में 31 मार्च 1930 को वो एक हॉस्पिटल में शहीद हो गए । ऐसे वीर क्रांतिकारी को शत शत नमन .

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